Assistant professor क्या लिखूं मुक़ाम अभी बाकी है, जिंदगी चल रही है कारवां बाकी है।।
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चल रही है ये हवा, या तुम मचल रही हो, बिजलियों का कौंध है , या तुम मन मे गरज़ रही हो, चाहती हो बरसना मुझ पर, या मन ही मन बस डोल रही हो, घनी रात है कैसी, ऊपर से सर्द मौसम, बरस भी जाओ