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बाहर गर्म रात दे रही है बुरे मौसम का इशारा और घिसटते हुए जा रहे हैं। बाहर गर्म रात दे रही है बुरे मौसम का इशारा और घिसटते हुए जा रहे हैं।
बसंत के बुखार के छाले की सूखी पपड़ी खुल जायेगी. बसंत के बुखार के छाले की सूखी पपड़ी खुल जायेगी.
लेखक: बरीस पास्तरनाक अनुवाद: आ. चारुमति रामदास लेखक: बरीस पास्तरनाक अनुवाद: आ. चारुमति रामदास
कवि: बरीस पास्तरनाक कवि: बरीस पास्तरनाक
लेखक: अलेक्सान्द्र पूश्किन अनुवाद: आ. चारुमति रामदास और कहता हूँ उससे: ... लेखक: अलेक्सान्द्र पूश्किन अनुवाद: आ. चारुमति रामदास ...
अनुवाद: आ. चारुमति रामदास अनुवाद: आ. चारुमति रामदास
कविता : मरीना त्स्वेताएवा अनुवाद: आ. चारुमति रामदास कविता : मरीना त्स्वेताएवा अनुवाद: आ. चारुमति रामदास
लेखिका: मरीना त्स्वितायेवा अनुवाद : आ. चारुमति रामदास लेखिका: मरीना त्स्वितायेवा अनुवाद : आ. चारुमति रामदास
लेखक : बोरिस पास्तरनाक अनुवाद : आ. चारुमति रामदास लेखक : बोरिस पास्तरनाक अनुवाद : आ. चारुमति रामदास
कवि: मिखाईल लेरमेंतोव अनुवाद: आ.चारुमति रामदास कवि: मिखाईल लेरमेंतोव अनुवाद: आ.चारुमति रामदास