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बाहर नहीं घूम सकते तुम जरा झाँक लो अपने ही भीतर बाहर नहीं घूम सकते तुम जरा झाँक लो अपने ही भीतर
ये नादान रिश्ते इन सब में उलझे हुए जाने क्यूँ बनते हैं ये बेनाम रिश्ते। ये नादान रिश्ते इन सब में उलझे हुए जाने क्यूँ बनते हैं ये बेनाम रिश्ते।
तू पथिक है, पथ को जान, तू राही है, राह को पहचान ! तू पथिक है, पथ को जान, तू राही है, राह को पहचान !
इस जानी पहचानी अनजानी सी भीड़ में अपने ही वजूद को तलाशता फिर रहा है ये मेरा मन। इस जानी पहचानी अनजानी सी भीड़ में अपने ही वजूद को तलाशता फिर रहा है ये मेरा ...
नये वर्ष की नयी है उमंग, मन में उठते नए तरंग, इन तरंगों से बदल दें, उन लहरों की दिशा ! नये वर्ष की नयी है उमंग, मन में उठते नए तरंग, इन तरंगों से बदल दें, उन लहरों ...
वही गलती...वही सिरा फिर से दोहरा रही हूँ न समझ न समझा पा रही हूँ वही गलती...वही सिरा फिर से दोहरा रही हूँ न समझ न समझा पा रही हूँ
पैरों में बेड़ियाँ हैं और हाथों में हाथकड़ियाँ पर दिल में उम्मीदें और मन में उसके सपने हैं। पैरों में बेड़ियाँ हैं और हाथों में हाथकड़ियाँ पर दिल में उम्मीदें और मन मे...
पहले जैसी कोई बात अब रही नहीं इसमें ना वो महक है ना वो स्पर्श पहले जैसी कोई बात अब रही नहीं इसमें ना वो महक है ना वो स्पर्श
टूट कर शब्दों में बिखर रहे मेरे विचार, उन्हीं शब्दों को पनाह देने की कोशिश कर रही हूँ मैं। टूट कर शब्दों में बिखर रहे मेरे विचार, उन्हीं शब्दों को पनाह देने की कोशिश ...
बस तुम ही मेरे हमसफर मेरी परछाई...! बस तुम ही मेरे हमसफर मेरी परछाई...!