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Sanju Srivastava
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I am from the teaching community, reading and writing is my passion

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Submitted on 09 Jul, 2019 at 18:11 PM

कल रात यहाँ मेज़ सजा था , आज वीरानी छायी है। मेहमान भर पेट खा कर विदा हो गये, पर, खाली पेट घूम रहे लोगों के , खाने को अब केवल झूठे पत्तल रह गये।

Submitted on 01 Jul, 2019 at 17:13 PM

आज चाय की प्याली में तेरा अक्स नजर आया । पर एक सिगरेट का कश लेते ही तू बस धुआँ धुआँ हो गया ।

Submitted on 01 Jul, 2019 at 17:03 PM

कौन कहता है कमबख्त , कि उनकी याद आती नहीं, पर हम हो गये हैं इतने शातिर, कि ये बात जतलाते नहीं।

Submitted on 01 Jul, 2019 at 16:53 PM

आज समंदर किनारे , रेत में बनाए तुम्हारे रेत के महल की याद आ गई। न अपना घर बसा पाए और न मेरा आशियाना बसने दिया।

Submitted on 01 Jul, 2019 at 16:39 PM

वक्त बेवक्त यूं न आया करो याद, भूलना हमें भी अब आ गया है, वक्त ने सिखा दिया है, यादों से बाहर निकलना ।

Submitted on 25 Jun, 2019 at 17:01 PM

यूं ही रोज चलते चलते , जिंदगी से मुलाकात हो जाती है, कहती है चलो साथ साथ चलते हैं, हँस कर टाल देता हूं कि, बेवफा से वफा की चाह कैसे कर सकता हूं।

Submitted on 24 Jun, 2019 at 17:04 PM

वो, बारिश की बूंदो को , अपनी हथेलियों में समेटना, फिर उन बूंदो को , मेरे चेहरे पर छिड़क कर खिलखिलाना, आज कि बारिश में न चाहते हुये भी, उफ,फिर तेरी याद आ गई । #संजू


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