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ज़ख्म भर गए...

ज़ख्म भर गए जाने कब के...टीस दिल मे तो भी होती है ज़रूर... गम अब उदास नही कर जाते उतना...मुसकुराहट फिर भी है लबों से दूर... तन्हाई को हबीब बना कर.... रूह से कर लिया है क़बूल... स्याह सांझ मे तो फिर क्यो...आपकी याद आती है हुज़ूर...

By Anubhuti Singhal
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