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क़ैद कर...

क़ैद कर लीजिए इन दिलकश आँखों के ज़ालिम जलवों को पलकों के पर्दे मे... गुनाह न हो जाए कभी बेबाक गुस्ताख इन नज़रों से... मदहोश होकर झील से गहरे चश्मो की कशिश में.. क़त्ल न हो जाए कोई...क़ातिल निगाहों के खंजरों से!

By Anubhuti Singhal
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