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यूं हीं गुज़र...
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यूं हीं...
“
यूं हीं गुज़र रहा था वक्त... कोई बेमकसद-सा फलसफा लिए, इस बेनूर - सी ज़िंदगी में तुम आ गए नूर बन के.... बस, मिल गई वजह जीने की...और सफ़र शुरू हो गया जिंदगी के।।। -तेजस्विनी कुमारी
”
By
Tejaswini Kumari
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