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यह शाम फिर...

यह शाम फिर से रंगीन हो जाए इस हग डे पर मेरा ये ख्वाब पूरा हो जाए मैं तेरे बाहों के दरमिया कुछ इस कदर महफूज रहूं हमे देखे सारी दुनिया जल जाए

By राजेश "बनारसी बाबू"
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