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ये ठोस...

ये ठोस -द्रव क्या मुझको रचते , मेरा तो निर्माण तू ही है , मेरे जीवन का मोक्ष , महाप्रयाण तू ही है , जितनी साँसे , लेकर आया , हर साँसों की हक़दार -तू ही है .

By Vikas Sharma
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