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ये इश्क है...

ये इश्क है या जिस्म का खेल ये इश्क आज अपनी पहचान भूल कर सिर्फ जिस्म का मोहताज बन चुका है । हर कोई आज सिर्फ रूप रंग को भाता है छिप गई है आज अंद्रुरूनी खुबसूरती आज प्यार सिर्फ दैहिक तो होता है| झूट फरेब आज हर कन्ही बसा है ना जाने सच्चा प्रेम कहां छुप सा गया है ।

By Sunanda Mohapatra
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