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वो मेरी...

वो मेरी खामोशी अब समझने लगी है दवे पांव मेरे दिल में आने लगी है अब निगाहे मिलने पे शर्म से अपनी निगाहें झुकाने लगीं है हमारे बीच की दूरियों को समेटने लगी है चलो ना अब इन नजदीकियों को बढ़ाए प्रपोज डे पर हम अपनी मोहब्बत जताए प्रपोज डे पर सनम तुम हम और हम तुम हो जाए वो पगली अब प्यार की बातें दोहराने लगी है

By राजेश "बनारसी बाबू"
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