“
वो हँसते हुए मेरी,
निगाहों में रह गए,
जिस कश्ती में थे,
उसी कश्ती के साथ ,
बह गए।
बस दूरियाँ बढ़ती गईं,
रास्ते,
मुकम्मल होते गए,
वो अलग और मैं अलग,
अपने-अपने सफ़र में
रह गए,
और हम…
एक-दूसरे की यादों में उम्र भर
रोते रह गए।
✍🏻 लेखक ✍🏻
युवराज सिंह राठौड़
”