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वो एक दिन...

वो एक दिन फिर और गुज़र गया सोचा तजुर्बा कुछ और बढ़ गया पर वो कुछ बात है पुरानी थोड़ी अन्दर मेरे आँखें ख़ुली रहीं और सूरज सर चढ़ गया। ~सिद्धार्थ

By Siddharth Tripathi
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