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उलझनों में उलझकर...
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उलझनों में...
“
उलझनों में उलझकर रह जाती है ज़िन्दगी अनचाहे रिश्तों में ठहर जाती है ज़िन्दगी घुटन सी होती है हर पल निकलने की शुरू तो हुई न जाने कब खत्म होगी ज़िन्दगी। M.S.Suthar
”
By
Maan Singh Suthar
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tragedy
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