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"तू यहां...
“
"तू यहां देखे जो हर रोज अपराध छलनी क्यों ना हो सीना तेरा अग्नि क्यों ना धधके सीने में तेरे। मै जो देखूं हर रोज अपराध आंखे क्यों मैं मुंदू । मै जलाऊं भीषण आग जल जाए अपराध जो होकर ख़ाक।। कंचन सिंगला
”
By
Kanchan Singla
329
अपराध
आग
साधारण इंसान क्या ख़ाक बचेंगे
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hindi quote
from
Kanchan Singla
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