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तुम्हे...
तुम्हे भुलाने...
तुम्हे ...
“
तुम्हे भुलाने के लियें ना जाने
कितने जतन किये कभी
शराब पी कभी कस्मे खाईं कभी हवन किये
पर फिर भी तुम्हारी याद आती है
आँखो से आशुओं की बरसात आती है
”
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