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तुम मेरे...

तुम मेरे दिल से खेलकर चले गए और इससे निकली आह, मग़र तुम अपने खेल से खुश होकर बोलते हो वाह जी वाह। शर्म आती है कि मैंने कभी तुम्हें अपना सब कुछ माना था, तुम्हें तो मेरे दिल को टूटे खिलौने की तरह भूल ही जाना था।

By Amit Singhal "Aseemit"
 


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