STORYMIRROR
होम
श्रृंखला
कहानी
कविता
कोट
ऑडियो
खरीदें
प्रतियोगिताएं
पुरस्कार
अकादमी
हमारे बारे में
हमारे साथ जुडे
संपर्क करें
लॉग इन करें
Sign Up
Terms & Condition
गोपनीयता नीति"
श्रृंखला
कहानी
कविता
कोट
ऑडियो
प्रतियोगिताएं
पुरस्कार
खरीदें
अकादमी
गिवअवे
हमारे बारे में
संपर्क करें
तमाम डाकख़ाने...
तमाम डाकख़ाने...
En
English
Hi
हिन्दी
Gu
ગુજરાતી
Ma
मराठी
Or
ଓଡ଼ିଆ
Bn
বাংলা
Te
తెలుగు
Ta
தமிழ்
Ka
ಕನ್ನಡ
Ml
മലയാളം
लाइब्रेरी
नियम और शर्ते
गोपनीयता नीति"
साइनअप
लॉग इन
En
English
Hi
हिन्दी
Gu
ગુજરાતી
Ma
मराठी
Or
ଓଡ଼ିଆ
Bn
বাংলা
Te
తెలుగు
Ta
தமிழ்
Ka
ಕನ್ನಡ
Ml
മലയാളം
फीड
लाइब्रेरी
लिखें
सूचना
प्रोफाइल
तमाम...
“
तमाम डाकख़ाने प्रेम से चलते रहे। और हमारी कचहरियां नफ़रत से...! ✅ हैरत नहीं है कि डाकख़ाने कम हो गए और कचहरियां मे भीड़ बढ़ती चली गईं। ऐसा नही लगता हैं कि प्रेम ढुब रहा नफरत जीत रही? लेखक देवाराम बिश्नोई
”
By
Devaram Bishnoi
723
तमाम डाकखाने प्रेम से चलते रहे
और कचहरिया नफरत से
प्रेम ढुब रहा नफरत जीत रही
More
hindi quote
from
Devaram Bishnoi
सब देखें
0
Likes
0
Comments
1
Likes
0
Comments
1
Likes
0
Comments
1
Likes
0
Comments
1
Likes
0
Comments
13
0
00:00
00:00
Download StoryMirror App