STORYMIRROR

तमाम...

तमाम डाकख़ाने प्रेम से चलते रहे। और हमारी कचहरियां नफ़रत से...! ✅ हैरत नहीं है कि डाकख़ाने कम हो गए और कचहरियां मे भीड़ बढ़ती चली गईं। ऐसा नही लगता हैं कि प्रेम ढुब रहा नफरत जीत रही? लेखक देवाराम बिश्नोई

By Devaram Bishnoi
 722


More hindi quote from Devaram Bishnoi
0 Likes   0 Comments
1 Likes   0 Comments
1 Likes   0 Comments
1 Likes   0 Comments
1 Likes   0 Comments