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तेरी वो...

तेरी वो बाते झूठी वो झूठी थी कसमें, दिल को तोड़ गया क्या वो झूठी रस्मे? अब तो सारी उमर आशू पीना है जिंदा लाश बनके अब जिंदगी भर रहना है अब दर्द ए जुदाई गम सारी उमर सहना है

By राजेश "बनारसी बाबू"
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