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तेरी सोच से...

तेरी सोच से परे है, ये स्तंभ जो खड़े है, करता जा तू कर्म बस, साथ मुरलीधर खड़े है। जब जब ङगमगाएगा तू सहारा मिलेगा तुझे कृष्ण कन्हैया का नोका तेरी होगी पार गीता का भी ये ही सार।

By Ananya Singhal
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