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जब बैठे...

“ जब बैठे कृष्ण- कन्हैया, हाथ में ले अपनी मुरली, दौड़ी -दौड़ी सखियां आई, सुन मुरली की धुन सुरीली। एक कहती गोपाला मेरा, दूजी ने माना प्रियतम है, अनन्य प्रेम देख मुरलीधर के लिए, प्रसन्नचित हुआ यमुना मैया का तीरा है। ”

By Ananya Singhal
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