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तेरी...

तेरी आँखे... मेरी आँखे... जब यूँ मिली तो इस कदर मेरी गर्दन झुकी की आज तक झुकी की झुकी है. तेरा वह देखना ही तो मार डालता है मुझे, कमबख्त मै जीना चाहता हूँ, छिपा ले मुझे तेरे आँचल मे...

By PRADEEP TIWARI
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