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"तेरे विरह...

"तेरे विरह में तड़प रही हुं, ओ श्याम" मुरली"धारी, हर पल तेरी याद आती है, ओ मेरे बांके बिहारी। आकर सुंदर मुखड़ा दिखा जा, तरस रही रात सारी, तेरे प्यारको तलस रही हुं, तुज़ बिन मै हुं अधूरी।" धनजीभाई गढीया"मुरली"

By Dhanjibhai gadhiya "murali"
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