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सुखविंदर की कलम से:
"खाली जेब और अस्पताल के चक्कर अक्सर सच्चे रिश्तों की औकात बता देते हैं। जब आपकी औलाद तड़प रही हो और अपने ही दरवाजे बंद कर लें, तो समझ लेना वो रिश्ते उसी दिन श्मशान की राख बन गए। याद रखना, जो तुम्हारे आंसुओं में तुम्हारे साथ खड़े नहीं हो सकते, उन्हें अपनी कामयाबी की छाँव में कभी मत बैठने देना। क्योंकि जो बुरे वक्त में बेगाने हो गए, वो अच्छे वक्त में भी सिर्फ आपके रुतबे के सगे होत
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