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सुबह की किरण...
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सुबह की...
“
सुबह की किरण निखर बिखर रही हैं, हवा भी ठहर सिहर अपने राग पर थिरक रही हैं थिरक मन रहा थिरक तन रहा चेहरा तेरा जब मुंडेर पर नजर आया, भरमाया ईक चाँद चाँदनी बिखेर अब भी रही है।। ❣राजीव जिया कुमार सासाराम।
”
By
Rajiv Jiya Kumar
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corporatelifeofficescribblingwant_to_be_famousbut_also_need_salary
you are my soul
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