“
सतरंगी सी दुनिया..
है दिल सतरंगी सी दुनिया ख़्वाबों की
जहाँ अधूरी ख्वाहिशें उड़ान भरती है
NOOR EY ISHAL
ए दिल..
बयान कर दे काग़ज़ पे ए दिल अपनी घुटन को
नफ़रतें पालने का सिलसिला अच्छा नहीं होता
NOOR EY ISHAL
ख़्वाब या हक़ीक़त..
कुछ देर पलकों पे बिठाके उसने मुड़के नहीं देखा
वो ख़्वाब था या हक़ीक़त हम सोचते ही रह गये
NOOR EY ISHAL
”