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दुनिया बेचैन है, किसी को सुकून मयस्सर नहीं... बेहतर है अपने आप पर काम करें, अपनी कमियों को सुधारें, गलतफहमियां दूर करके इंसानियत को बचाने में एक-दूसरे की मदद करें।
पहले भी हम सभी के बुजुर्गों ने इस विरासत को अपनी मेहनत से बाकी रखा था... अब यह जिम्मेदारी हम सबकी है।
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