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शोर-गुल राहो में...
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शोर-गुल...
“
शोर-गुल राहो में घूमना अब आदत सी बन गई है,तन्हा वक्त गुज़ारना अब शिकायत सी बन गई है। इस वीराने को दूर करने को दरबदर सहारा ढूंढ़ते फिरते हैं,अपने जज्बातों की टूटी नाव से किनारा ढूंढते फिरते हैं। -मानसी
”
By
Mansi Sharma
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