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शब्द संजोए...

शब्द संजोए लिखती हूं कविता कविता नहीं मेरे अंतर मन की दास्तां कुछ भूले बिसरे कुछ है ताज़ा कविता,बनिता,लता नहीं उठ पाएंगे विना थामे किसी का सहारा। ये सच है क्या? अमीता दाश 🙏

By Amita Dash
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