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रविवार: ज्यो...
“
रविवार: ज्योति प्रेम की सही, जलाना चाहता वही। दीप तन्हाई का डसे, जलाकर मैं रह गया। 12062022:01:43am
”
By
Sumit. Malhotra
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अंधकारकोक्योंधिक्कारेअच्छाहैएकदीपजलाये।कर्मोंकीअद्भुतज्योतिसेअपनाजीवनपथचमकाये।
प्रेम की परिभाषा
मात्रवहींकार्यसहीहोतेहैं
जलाना
मैंमचलनाचाहताहूँ
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