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राखों...
राखों में सिमटते...
राखों में...
“
राखों में सिमटते दिखे जलते हुए सपने,
आँखों में मगर फिर भी उम्मीद जगी है।
जब साथ निभाते नहीं ज़िंदगी में अपने,
तब हौसले की सीने में एक आग लगी है।
”
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