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पिता का...

पिता का प्रेम है मधुर सरस जो मन में भरे उमंग माँ की ममता पानी जैसी स्वाद न कोई रंग जैसे जल बिन जीवन नाहीं मीन हो या मतंग वैसे माँ के बिन है जीवन जैसे कटी पतंग

By Dr. Nidhi Priya
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