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नफ़रत का...

नफ़रत का जमा हुआ धूमिल बिखरने लगा, प्यार की शहनाई आज बजाने लगा आलम। दौड़कर सनम की बांहों में सिमट गया "मुरली", बरसी प्यार की बारिश, शरमा गया आलम। -धनजीभाई गढीया"मुरली

By Dhanjibhai gadhiya "murali"
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