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नासमझ शायरी...

नासमझ शायरी समझते हैं मेरे दर्द को, और मुस्कुरा देता हूं मैं अरे कोई तो बताओ उन्हें, मुझे वाह नहीं, मरहम चाहिए

By robin jain
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