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मुक्तक :...
“
मुक्तक : तर्ज : कोई दीवाना कहता है मिली नजरों से जब नजरें , नजर में आप आ बैठे तेरे दिल से हम अपना दिल , मेरी जाना लगा बैठे जहां जाता हूं संग चलती हो एक साये के जैसे तुम मेरी धड़कन के साजों में , तेरे ही नगमे सजा बैठे हरिशंकर गोयल "हरि" 1.9.21
”
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कवि हरि शंकर गोयल
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कवि हरि शंकर गोयल
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