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मेरे दिल के दरों दीवार पर, टंगी हुई आज भी तेरी याद है,
मेरे बिस्तर के सिलवटों में तेरी खुशबू तेरे जाने के बाद है।
ज़माना रोज ताना कसता है, तेरी जुदाई का मुझ पर,
वक्त रोज हसता है मेरी सराफत ए बेवसी देख कर,
पर सबको सचाई कहां पता है, मेरे पे क्या बिता है;
कल तक तो इश्क में सिर्फ मेरा रूह नाशाद था, मगर आज तो अकेलेपन से मेरी जिंदगी बर्बाद है।।
मेरे बिस्तर के सिलवटों में तेरी खुशबू तेरे जाने के बा
”