STORYMIRROR

मेरे देश...

मेरे देश में समाये हैं सारे मजहब, प्रेम और शांति के वार्ता को देता है अदब, डुबाना चाहा कितनो ने इसका आफ़ताब, भूल गए वो की काँटों के बीच में भी खिलता है गुलाब |

By Shashikant Das
 241


More hindi quote from Shashikant Das
17 Likes   0 Comments
27 Likes   0 Comments