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मेरे अरमान बुझे...
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मेरे अरमान...
“
मेरे अरमान बुझे से क्यों है आज शमशान सुने से क्यों है मेरी अर्थी को कंधा देने वाले आज तेरे कदम रुके से क्यों है
”
By
राजेश "बनारसी बाबू"
217
अरमान बुझे
शमशान
अर्थी
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राजेश "बनारसी बाबू"
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