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मेहनतकश...

“ मेहनतकश माथे पर पसीनें की बूंदें, औ' चट्टान से हाथों की दरारें, तय करती हैं लकीरों की दिशा, हाँ, सड़कें आज भी लकीरें खींचती हैं। ”

By Gaurav Singh "Gaurav"
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