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मैंने हरि प्रेम से श्रृंगार किया मैंने त्यागा ये संसार अमूल्य रत्नों का मोह नहीं मुझे तो भाये वैजंती का हार 56 भोग जो हरि को प्रिय और मुझे हरि का प्यार मेरे बिना वो छप्पन भोग भी ना स्वीकारें मैं उस हरि प्रिया तुलसी का अवतार
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Snehdeepwrites 🌼❤️
@Author Snehlata
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