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मैने ये शेर...

मैने ये शेर पढ़ा दर्द से मरते मरते मेरी आंखे क्यू ना फूट गई यह वसीयत को पढ़ते पढ़ते वृद्ध मां बाप अपना हाल ए दर्द सुनाते रहे रोते रोते बच्चे संपत्ति के लालच में मारते रहे यह कहते कहते मेरे क्यू नही नाम कर रहा संपत्ति जिंदा रहते रहते

By राजेश "बनारसी बाबू"
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