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मांँ क्यों...
“
मांँ क्यों तू आदत सी हो गई, माँ नींद कम क्यों हो गई है मांँ तेरी खुशबू आम के अचार में, मांँ तू बसती है घर की हर दीवार में। आज फिर बाहों में सुला लो ना मांँ, ममता की आंचल में छुपा लो ना मॉं।
”
By
राजेश "बनारसी बाबू"
423
मांँ
बाहों में
घर की दीवार
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राजेश "बनारसी बाबू"
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