STORYMIRROR

लगा दी आग...

लगा दी आग सावन ने बदन तेरा शरारा है मेरी धड़कन ये कहती है मुझे तूने पुकारा है लरजते होंठ हैं तेरे अधर मेरे भी प्यासे हैं बुझा दे प्यास दोनों की ये मौसम का इशारा है Sanjay Jain

By Sanjay Jain
 85