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लब्ज़ों में...

लब्ज़ों में ना हो पाने वाले जज़्बात अक्सर आँखों से बयां होते हैं ; बस समझने की चाह होनी चाहिए | दिल तो कई दफ़ा भटक जाता है; बस मंज़िल की एक पक्की राह होनी चाहिए |

By Rabindra Kumar Behera
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