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कुछ इस तरह उलझी...
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कुछ इस तरह...
“
कुछ इस तरह उलझी हु खुद में की अब जब हवा भी चलती है तो घुटन से लगती है और अंधेरे में करवट बदलने में भी झिझक सी लगती है
”
By
Sneha Mishra
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