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कुछ चले हैं, कुछ...
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कुछ चले...
“
कुछ चले हैं, कुछ बढ़े हैं, कुछ चढ़े हैं, हाँ मगर आखिरी सोपान तक पहुंचे नहीं हैं हम अभी बांटते हैं रोज लाखों लाख खुशियाँ हाँ मगर आखिरी इंसान तक पहुंचे नहीं हैं हम अभी!!
”
By
devika bansal
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