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करके...

करके नेकियां दरिया में डाल देता हूं खुद से खुद को विपदा में डाल देता हूं बिना बात ही मैं सिर पे बवाल लेता हूं लोग मतलब से हमसे काम लेते लोग स्वार्थ हेतु हमसे उल्लू सीधा करते मैं दिन दोपहर अपना जीना हराम कर लेता हूं

By राजेश "बनारसी बाबू"
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