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कितने ही...

कितने ही प्यार से संभालो रिश्ते,सिलवटें आ ही जाती हैं, कभी डगमगता विश्वास तो कभी ख्वाहिशें आड़े आती हैं, प्यार,विश्वास से बंधी रिश्तो की डोर बड़ी नाजुक होती है, ज़रा सी ग़लतफहमी भी इस डोर को कमज़ोर कर देती है। मिली साहा

By मिली साहा
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