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खुद को भूलाकर...
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खुद को...
“
खुद को भूलाकर औरों के लिए जीता रहा, मैं हर पल हर घड़ी अपना वज़ूद खोता रहा, ज़िन्दगी के इस मोड़ पे खुद को समझना है, खुद से खुद का एक रिश्ता मुझे जोड़ना है।।
”
By
मिली साहा
252
खुद से खुद का रिश्ता
ज़िन्दगी
हमसफरकुतलाशपरलिखीगईयहमेरीकविताहैं
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मिली साहा
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